डेली मन्ना
13
12
122
भविष्यवाणी वाली मध्यस्थ प्रार्थना क्या है?
Sunday, 9th of August 2026
Categories :
भविष्यवाणी
मध्यस्था
“याकूब ने राहेल के लिए सात वर्ष सेवा की, लेकिन उसके प्रेम के कारण वे वर्ष उसे कुछ ही दिनों के जैसे लगे।” — उत्पत्ति 29:20
याकूब राहेल से बहुत प्रेम करता था। इसलिए उसके लिए सात साल भी कुछ ही दिनों के जैसे लग रहे थे। इसी तरह, जब हम प्रार्थना और मध्यस्थता केवल अपनी जिम्मेदारी समझकर नहीं, बल्कि परमेश्वर के लिए प्रेम के साथ करते हैं, तो हमारी प्रार्थना में एक अलग तरह की आत्मिक सुगंध आती है।
परमेश्वर से सुनना और उससे प्राप्त करना
अगर हम बाइबल में उन लोगों के जीवन को देखें जिन्हें परमेश्वर ने शक्तिशाली रूप से इस्तेमाल किया, तो हम पाएँगे कि वे परमेश्वर की आवाज़ सुनना, उसकी बात समझना और उससे दिशा प्राप्त करना जानते थे। आइए, दाऊद का उदाहरण देखते हैं। दाऊद बहुत से युद्धों में जीतता था। इसका एक कारण यह था कि युद्ध में जाने से पहले वह परमेश्वर से प्रार्थना करता और उससे पूछता था कि उसे क्या करना चाहिए।
1 शमूएल 30:8 में लिखा है:
“दाऊद ने यहोवा से पूछा, ‘क्या मैं इन लोगों का पीछा करूँ? क्या मैं उन्हें पकड़ पाऊँगा?’ परमेश्वर ने उत्तर दिया, ‘उनका पीछा कर, तू उन्हें जरूर पकड़ेगा और सब कुछ वापस ले आएगा।’ दाऊद ने पहले परमेश्वर से पूछा। परमेश्वर ने उसे जवाब दिया और बताया कि उसे क्या करना है। फिर दाऊद ने वही किया जो परमेश्वर ने कहा था। यही हमारे लिए भी एक उदाहरण है।
भविष्यवाणी वाली मध्यस्थ प्रार्थना क्या है?
भविष्यवाणी वाली मध्यस्थ प्रार्थना का मतलब है कि हम किसी व्यक्ति, परिवार, कलीसिया या देश के लिए प्रार्थना करते समय परमेश्वर से दिशा और जानकारी भी माँगते हैं। हम केवल अपनी बात परमेश्वर को नहीं बताते, बल्कि प्रार्थना करते समय उसकी बात भी सुनते हैं।
पुराने समय में जब हम रेडियो सुनते थे, तो सही स्टेशन पकड़ने के लिए डायल को थोड़ा आगे-पीछे करना पड़ता था। जब सही जगह पर डायल आता था, तब आवाज़ साफ सुनाई देती थी। इसी तरह हमें भी अपने आत्मिक कान और आँखें परमेश्वर की ओर लगाना सीखना है, ताकि हम समझ सकें कि परमेश्वर हमसे क्या कह रहा है। जब हम जिस विषय के लिए प्रार्थना कर रहे हैं, उसके बारे में परमेश्वर से उसकी इच्छा और दिशा जानने की कोशिश करते हैं, तो इसे भविष्यवाणी वाली मध्यस्थ प्रार्थना कहा जा सकता है।
भजन संहिता 53:2 कहता है “परमेश्वर ने स्वर्ग से मनुष्यों पर दृष्टि की, कि देखे कि कोई समझदार है या नहीं, और कोई परमेश्वर को खोजता है या नहीं।” जब हम सच में परमेश्वर को खोजते हैं और उससे समझ माँगते हैं, तो हमारी प्रार्थना केवल एक धार्मिक काम नहीं रह जाती। चाहे हम कलीसिया, देश या अपने परिवार के लिए प्रार्थना कर रहे हों, हमें परमेश्वर की धीमी और शांत आवाज़ को सुनने के लिए तैयार रहना चाहिए।
परमेश्वर हमें कैसे बताता है?
जब हम किसी विषय के लिए प्रार्थना कर रहे होते हैं, तो परमेश्वर हमें अलग-अलग तरीकों से समझ दे सकता है। जैसे: सपनों के द्वारा, दर्शन के द्वारा मन में आने वाली पवित्र आत्मा की प्रेरणा के द्वारा, बाइबल के किसी वचन के द्वारा, जिसे पवित्र आत्मा हमारे ध्यान में लाता है। अगर हम समूह में प्रार्थना कर रहे हैं और हमें प्रभु से कुछ प्राप्त होता है, तो हमें तुरंत सबके सामने बोलने की जरूरत नहीं है। हमें पहले शांति से उस बात को प्रार्थना के अगुवे को बताना चाहिए यहीं पर हमारी नम्रता दिखाई देती है। कई बार हम चाहते हैं कि लोग हमें देखें और हमारी बात सुनें। लेकिन इसी जगह पर घमंड हमारे अंदर आ सकता है। इसलिए हमें नम्र रहना चाहिए और जो कुछ परमेश्वर हमें दिखाता या बताता है, उसे सही तरीके से और सही समय पर साझा करना चाहिए।
भविष्यवाणी वाली मध्यस्थ प्रार्थना का उद्देश्य अपनी इच्छा पूरी करवाना नहीं, बल्कि जिस विषय के लिए हम प्रार्थना कर रहे हैं उसमें परमेश्वर की इच्छा पूरी होने के लिए प्रार्थना करना है।
बाइबल पढ़ना: यशायाह ६१-६४
आज का दैनिक मन्ना ऑडियो सुनें
प्रार्थना
हे पिता, मुझे अनुग्रह दे कि मैं पूरे मन से तुझे खोजूँ। मेरी आँखें और कान खोल, ताकि मैं देख और सुन सकूँ कि तू मुझसे क्या कह रहा है। मुझे अपनी इच्छा समझने और उसके अनुसार प्रार्थना करने में मदद कर। यीशु के नाम में। आमीन।
Join our WhatsApp Channel
Most Read
● मध्यस्थता से प्रभु की भविष्यवाणी● आत्मिक समृद्धि (उन्नति) का रहस्य
● अस्वीकार पर विजय पाना
● खतरे का संकेत
● आपका दिन आपको परिभाषित (वर्णन) करता है
● अपने ह्रदय का प्रतिबिंब
● अपने अतीत को अपने भविष्य के नाम की अनुमति न दें
टिप्पणियाँ
